Wednesday, 13 June 2018

A real heart touching story..my own experience

में चिल्ला रहा था... लेकीन वहा कोइ नही था..


चिल्ला चिल्ला के मेरी हालत बहोत नाजुक हो गइ थी.., में पता नही कब सो गया.. जब फिर मेरी आंखे खुली तब मैने पाया की मेरे ईदगीर्द छोटे छोटे बच्चे बैठे थे.. और मेरे माथे पर अपने हाथ सहला रहे थे..तब जाकर मुजे अपने होने का अहेसास हुआ.. और मुजे मालुम हुआ की मुजे मेरे गले पर चोट आइ है..तब मुजे हलका सा याद आया की मुजे मुजसे बडे कुत्ते ने मेरे गले पर काट कर या शायद नाखुन मार कर झखम दीये होंगे.. इतना याद करते ही मुजे दर्द का अहेसास हुआ.. इसलीेये मै चिल्लाने लगा..

 मुजे चिल्लाता देख बच्चो को लगा की मुजे भुख लगी होगी.. और इसलीये उन्हो ने मुजे दुध पिलाया.. जोकी मुज को नही देना चाहीये.. क्यु की मैं बहोत छोटा था..और इस लीये वो दुध मुजे हजम नही हुआ.. और मेरी हालत बहोत नाजुक हो गइ.. और मैंने दर्द की वजह से चिल्लाना चालु रखा.. उतने में उन छोटे बच्चो ने उनसे बडे एक लडके को बुलाया.. मुजे देखकर उसे मुज पर तरस आने लगी.. मैने उसकी आंखो में देखा.. मुजे मालुम हुआ की वो मेरे दर्द को समज ने की कोशीष कर रहा है.. तभी वो बोला की, "में Animal helpline" में बात करता हुं..

वो क्या बोल रहे थे, मुजे कुछ समज नही आ रहा था.. लेकीन में उनके चहेरे पर मदद करने का भाव देख शकता था.. थोडी बहोत दैर के बाद.. एक एंम्ब्युलंस आइ और उसमे से एक डोक्टर बहार आए और उनहो ने मेरे झखम पर दवाइ लगाइ.. दवाइ की असर से मुजे और पीडा होने लगी.. और में दर्द के मारे और चिल्लाया..तभी मैने पाया की मेरे शिर पर कीसी का हाथ फीर रहा था..और वो दुजा कोइ नहीं बल्की वो लडका था जिसने एंम्ब्युलंस को बुलाइ थी..मुजे दवाइ भी पीलाइ गइ..और सब बच्चे मुजे वापस अपने पास ले गये..

 अब मुजे अच्छा लगता था लेकीन मैने अभी तक लघुशंका नही की थी..तो मुजे मेरे पेट में दर्द हो रहा था..और उसकी वजह से में चिख रहा था.. मे अकेला था.. मुजे भी पता नही था की में कहा से आया था और अगर पता भी होता तो में कैसे इन लोगो को बता पाता?.. क्युंकी मे तो एक जानवर था..अगर मै बोलता, फीर भी वो समज नही पाते.. लेकीन फीर भी मेरे में इतनी ताकत भी नही थी की में अपने हाथ पैर अपने आप उठा पाऊ... में बहोत लाचार था, मेरे पास दुसरो पर निर्भर होने के अलावा और कोइ रास्ता नही था..लेकीन मैने तब बच्चे बात करते थे उनको सुना... उन्हो ने कहा: "अब इसका क्या करे?, अगर इस कुत्ते के बच्चे को अकेला रखेंगे तो दुसरे कुत्ते इसको मारेंगे.. तो इसका क्या करे?".., तभी एक लडकी बोली: " में इसको मेरे पास रखती हुं.. जोभी दवाइ हेै वो में इसको खिलाउंगी".. तब उसने मुजे उठाया और अपने घर की और कदम रखे..

 मुजे थोडी देर बाद मालुम हुआ की वो लडकी उस लडके की बहन थी जिसने मेरे लिये एंम्ब्युलंस को call कीया था..मुजे थोडी राहत मिली.. जैसे जैसे घडी मे वक्त बीत रहा था वैसे ये लोग मुजे अपने लगने लगे थे..उतने में उनकी मा आइ और मुजे देख कर उनहो ने भी मेरे दर्द को महसुस कीया.. तब उनकी मा ने कहा, "अब से ये हमारे साथ ही रहेगा..और हम ही उसकी देख भाल करेंगे"... फीर उन लोगो ने मिल कर मुजे नाम दीया: "मिक्कु".. फीर वो लोग मुजे इसी नाम से पुकार ने लगे.. तब मजे परीवार क्या होता है वो महसुस हुआ..

 तीन दीन बीत गये,..वो मेरा हर वक्त ख्याल रखते थे.. मेरी दवाइ खाने का समय.., मुजे खिलाने का समय.., हां मे कहेना भुल गया की 'मुजे पानी वाला दुध' पिला ने की इजाजत डोक्टर ने दी थी.. दीन मे वो मुजे अपने घर पर और रात मे वो लडका मुजे अपने छत पर ले जाता था..जहा उसके दोस्त भी रात को सोया करते थे... छत पर इसलीये ताकी मुजे ठंडे पवन में चैन मिले.. पहेली रात वो लडका मेरे लीये जागा और उसके साथ उसका भाइ भी जागा था.. दोनो मिलकर रात भर बाते करते और जब मुजे दर्द होता और मे चिल्लाता तो मेरे पास तुरंत आ जाते..

एक तीसरा दोस्त नींद मे से कभी कभी जाग कर मेरी तरफ आता था में कैसा हु वो देखने.. दुसरी रात भी वैसा हुअा..और उस दीन भी उन लोगो ने एंम्ब्युलंस बुलाइ थी क्युंकी में लघुशंका नही कर पा रहा था..तीसरे दीन भी ऐसा ही हुआ.. उस लडके को लगा की सिर्फ ये दवाइ से मे ठीक नही हो पाउंगा.. इसलीये वो और उसका एक दोस्त मुजे private अस्पताल में ले गये..

वो जगह देख कर में बहोत डर गया था क्युंकी वो जगह पे बडे बडे कुत्तो की चिखने चिल्लाने की आवाज आती थी.. में बहोत डर सा गया था तभी उस लडके ने वहां के डोक्टर को मेरे बारे में बताया और साथ मे चल रही मेरी treatment के बारे में भी बताया..जब डोक्टर ने मेरे पेट को छुआ.. उन्हो ने कहा की ये बच्चा आज शाम तक मर जायेगा..ऐसा सुनते ही मैने उस लडके की आंखो में देखा.. मैने पाया की वो अंदर से बहोत जोरो से हील सा गया था और रो रहा था लेकीन उसने वो अपने अंदर ही रखा..तब डोक्टर ने मुजे एक DNS का बोटल चढाया..तब मुजे उन दवाइयो से बहोत दर्द हो रहा था और में चिल्लाता था तब वो लडका मुजे कहेता: "बस बेटा, चुप हो जा..तुजे मेरी खातीर जीना है..तुजे कुछ नही होगा..इतना कमजोर क्युं है तु?..शैर जैसा बन..मजबुत बन" उसे लगता था की में उसकी आवाज सुन शकता था और वो बात भी सच थी..क्युंकी वो जो भी बोल रहा था, वो में महसुस कर शकता था..

 दुसरे दीन उसके और उसके घर वालो के प्यार से में थोडा बहोत मजबुत हुआ..मै अपने आप से हाथ पैर हीला शकता था..और रात तो छत पर ही बीतती.. अगले दीन उस लडके की बर्थ डे थी..फिर भी वो मेरे लीये पुरी रात जागा.. 5 दीन हो चुके थे फिर भी मैं अपने आप खडा नही हो शकता था.. और मेरा दर्द तो मिट चुका था लेकीन मेरा पेट बहोत फुल गया था..क्युंकी मुजे गैस हो गइ थी.. मेरी वजह से इन लोगो का बहार जाना भी बंध हो गया था.. अब वो पेट का दर्द मुजे ज्यादा होने लगा और जब में चिल्लाता तो वो लोग तुरंत आ जाते लेकीन ये जब ज्यादा हो गया तब वो लोग भी मुजसे थक गये.. इसमें गलती हालात की थी..क्युकी मै तो ठहेरा आवारा गली का कुत्ता..लेकीन फिर भी इन लोगो ने मुजे अपने बेटे की तरह रखा..ओर मेरा इलाज करवाया..

अब उन्हो ने सोचा की कोइ मुजे ले जाकर मुजे अच्छी तरह पाल कर और मेरी दवाइ कर कर मुजे ठीक करे उसको इसे(मुजे) दे आते है..मुजे इन लोगो से जुदा होने का डर था लेकीन में कुछ नही बोला कयुंकी वो लोग पहेले से मेरी वजह से काफी परेशान थे.. उस लडके की बहन और वो जो बच्चे जीनहो ने मुजे उठाया था वो लोग सभी को पुछकर आये..लेकीन अगर इंसानियत किसी में जिंदा हो तब ना..सब ने मना कर दीया..

आखीर में एक थोडा बुढा इंसान मिला उसने कहा: "कोइ बात नही में इसे अपने पास रखुंगा लेकीन जो दवाइ के पैसे है वो आपको मुजे देना होगा" बच्चे वो करने को भी राजी हो गये लेकीन जब उन्हो ने उस बुढे को पुछा की कीतने रुपये चाहीये? तो बुढे ने कहा: "ज्यादा नही सिर्फ 5,000" लेकीन बच्चे होशियार थे उनको पता चल गया की ये बुढा 5,000 उसके दारु के लीये मांग रहा था..तब मेरी आंख में आंसु आ गये की दुनीया में कैसे लोग रहते है?..जिसको सामने वाला मरने पडा है फीर भी सिर्उ उसे खुद का स्वार्थ दीखता है?..वाह इंसान वाह.. एक तरफ ये बच्चे जो उतने भी लायक नही होते की खुद के पैरो पर जी शके फीर भी मेरे जैसे आवारा की मदद करते है..तभी दुसरी और समजदार होकर भी मुज जैसे का फायदा उठाना चाहता है..

 वो लोग वापस आ गये..ये लोगो ने सारी बात उस लडके को बतायी..उसने इंटरनेट पर सर्च कीया और उसे एक संस्था मिली: RRSA Foundation की जो ऐसे बिमार जानवरो को अपने पास रखते है और उनका इलाज भी करवाते है.. उस लडके ने देर तक कुछ सोचा और अपने घर में बात की इस बारे मे की हम मिक्कु को इस संस्था मे रख कर आते है और जब भी वो ठीक हो जायेगा हम उसे पालेंगे...लेकीन मेरा इन लोगो से दुर जाने का बिलकुल भी मन नही था...और मे ये भी महसुस कर शकता था की उनको भी मुजे उनसे दुर रखना अच्छा नही लगता..लेकीन ये उनकी मजबुरी थी और वो मुजे इस तरहा तडपता नही देखना चाहते थे..

 जब उस लडके ने मुजे ले जाने के लीये उठाया, में अदंर से बहोत रो रहा था...लेकीन कुछ कहे ना शका..जैसे ही वो मुजे ले जाने लगा, उसकी मां जोरो से रोने लगी..मेरी उनके साथ बहोत गहेरी माया बन गइ थी..उनसे मुजे ले जाता हुआ दीखा नही गया और उनहों ने मुजे जाता हुआ देखा ही नही ताकी मुजे तकलीफ में देख कर वो फीरसे ना रो पडे. में अब ये लोगो को छोड कर जा रहा था.. उस लडके ने मुजे उस संस्था वालो को देकर बीना मुजे देखे चले गये..क्युंकी वो मुजे तकलीफ में नही देखना चाहते थे..उस लडके ने मन मे सोचा था की, "अब जब भी में अपने मिक्कु को मिलने आउंगा तो वो दौड कर मुजसे मिलने आयेगा"...
..... लेकीन शायद उसे ये नही पता था की अब ये मिक्कु उसे इस जिंदगी मे कभी नही मिलने वाला है...
--- उसी दीन मिक्कु ये दुनीया को छोडकर हंमेशा के लीये चला गया --- वो लडका मैं ही था.. में आज भी उसे जब भी
याद करता हुं तो अंदर से बहोत रोता हुं... - यज्ञेश सुथार